__जयपुर के आराध्य देव श्री गोविंद देव जी मंदिर में स्वयं को एकल ट्रस्टी के नाम से प्रचारित श्री अंजनी कुमार गोस्वामी क्या वाकई में एकल ट्रस्ट के कार्य भाई 99 को पारित ट्रस्टी है? श्री रंजन कुमार गोस्वामी के पिताजी श्री प्रत्याशी का जेष्ठ किए गए थे प्रद्युमन... कुमार गोस्वामी जी जिनका स्वर्गवास 3 पुत्र होने एवं लगातार दिसंबर 1997 में हो गया था तथा वे एकल ट्रस्टी पूर्ववर्ती पंजीयन के नाम से श्री गोविंद देव जी मंदिर की पूजा अर्चना आदेश दिनांक अभी तक श्री कर रहे थे परंतु एकल ट्रस्टी होने के कारण उनके 20-09 1972 अंजन कुमार लोक गोलोकवासी होने के बाद वह ट्रस्ट समाप्त हो में वर्णित गोस्वामी को गया। इस संबंध में उनके जेष्ठ पुत्र वर्तमान पुजारी श्री प्रावधान के ट्रस्ट के रूप अंजनी कुमार गोस्वामी ने सार्वजनिक प्रन्यास अनुसार " में मान्यता अधिनियम 1959 की धारा 41 के अंतर्गत एक प्रार्थना कार्यवाहक प्रत्याशी घोषित किए जाने योग्य मानते प्राप्त नहीं होने के बाद भी अभी तक सरकार में किस पत्र प्रस्तुत किया था जिस पर तत्कालीन सहायक हुए श्री अंजनी कुमार गोस्वामी को सक्षम अदालत प्रकार अपने लेटर हेड पर एकल प्रत्याशी के रूप का आयुक्त द्वारा पूर्ण जांच कर प्रार्थी अंजन कुमार को में आवेदन प्रस्तुत करने के आदेश दिनांक 3-11- संबोधन किस प्रकार वैध है। किसी भी न्यास के पंजीयन समान से व्यंजन दिनांक परिवर्तन नहीं होते हैं यह तो निश्चित है की पुरानी ट्रस्ट को अब इसमें नाम से ना तो संबोधन किया जा सकता है और ना ही उसमें किसी प्रकार का परिवर्तन संभव नहीं है इसके लिए यह जरूरी है कि एक नया ट्रस्ट बनाया जाए जो श्री गोविंद देव जी मंदिर पर कार्य कर सकें यह अभी तक विवादित मामला होने के बावजूद भी जन्माष्टमी के लिए जिस प्रकार लेटर हेड पर जयपुर कलेक्टर से जन्माष्टमी पर्व मनाने के लिए स्वीकृति दी जाती है उस पर किसी भी रूप में कार्यवाहक अथवा अन्य किसी प्रकार का स्पष्ट संबोधन नहीं होना क्या इस बात को दर्शाता है की सरकार में दिए गए कागज भी अवैध की श्रेणी में आते हैं तथा सरकार को गलत जानकारी देने का भी स्पष्ट मामला बनता है
क्या जयपुर आराध्य श्री गोविंद देवजी मंदिर में बना ट्रस्ट अधिकृत है